नई दिल्ली, दिसम्बर 29 -- भारत सरकार रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके साझेदार बीपी के खिलाफ एक मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) मामले में 30 अरब डॉलर से अधिक के मुआवजे की मांग कर रही है। सरकार का आरोप है कि कंपनियों ने कृष्णा गोदावरी बेसिन के D6 ब्लॉक में स्थित D1 और D3 नामक दो समुद्री गैस क्षेत्रों से पर्याप्त गैस का उत्पादन नहीं किया, जिससे देश को भारी नुकसान हुआ है।मध्यस्थता की स्थिति यह विवाद वर्ष 2016 से भारत में एक तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल के समक्ष चल रहा है। नवंबर 2024 में इसकी अंतिम सुनवाई हुई थी। ट्रिब्यूनल के मध्य वर्ष 2026 तक अपना फैसला सुनाने की उम्मीद है। हालांकि, इस फैसले को भारतीय अदालतों में चुनौती दी जा सकती है।परियोजना का इतिहास और विवाद D1 और D3 क्षेत्र भारत की पहली प्रमुख गहरे समुद्र की गैस परियोजना थे, जिन्हें देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता...