लखीसराय, जून 11 -- प्रकाश मंडल, चानन। सुबह से शाम तक बांस की टोकरी सहित अन्य समान बनाने बाले तुरी समाज के लोगों का आजादी के 78 साल बाद भी समुचित विकास नहीं हो सका है। पारंपरिक रूप से बांस के सामान बनाने और सुअर पालने वाले ये लोग आज भी हासिये पर हैं। आधुनिक समय में प्लास्टिक के सामानों के बढ़ते उपयोग के कारण, तुरी समुदाय का पारंपरिक व्यवसाय प्रभावित हुआ है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि उनका विकास संभव नहीं है। समुचित प्रयासों और नीतियों के माध्यम से तुरी जाति के लोग भी अन्य जातियों की तरह सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ सकते हैं। अनुसूचित जाति में आने के बावजूद ये आरक्षण का कोई लाभ नहीं उठा पाते हैं। डोम समुदाय को समाज में अभी भी अस्पृष्य या अछूत समझा जाता है।

इन गांवों में बसे हैं तुरी समुदाय के लोग: चानन प्रखंड के मननपुर बाजार, चुरामन ...