नई दिल्ली, फरवरी 9 -- राजस्थान में स्कूली शिक्षा की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रदेश के कुल 1.06 लाख स्कूलों में से 14,028 स्कूल ऐसे हैं, जहां आज भी लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट की सुविधा मौजूद नहीं है। इनमें करीब 9 हजार सरकारी स्कूल और लगभग 5 हजार निजी अथवा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शामिल हैं। यह स्थिति तब है, जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक अहम फैसले में मासिक धर्म स्वच्छता और उपयोग लायक टॉयलेट को जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा करार दिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि वर्ष 2015-16 में राजस्थान के 97 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए उपयोग योग्य टॉयलेट उपलब्ध थे, लेकिन 2024-25 तक यह आंकड़ा घटकर 87 प्रतिशत रह गया। यानी एक दशक में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ी है।राष्ट्रीय औसत से पीछ...
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