प्रयागराज, अप्रैल 22 -- प्रयागराज। जिले में हर साल लगभग एक लाख घरों में किलकारी गूंजती है। इसमें से निजी व सरकारी अस्पतालों में होने वाले 90 से 91 प्रतिशत प्रसव की जानकारी स्वास्थ्य विभाग से साझा की जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों में प्रसव के जो लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं, उसके सापेक्ष प्रसव नहीं हो रहे हैं। जबकि प्रसव कराने वाली महिलाओं को विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता, निःशुल्क उपचार, दवाइयां और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। इसके बावजूद मरीज और उनके परिजन निजी अस्पतालों में प्रसव कराते हैं। यहां तक कि गर्भवती महिलाएं जांच तो सरकारी अस्पताल में कराती हैं, लेकिन जब प्रसव का समय आता है तब निजी अस्पताल जाती हैं। सूत्रों के मुताबिक गर्भवतियों को निजी अस्पताल तक पहुंचाने में दलाल और स्वास्थ्य विभाग के कुछ ...