मेरठ, अप्रैल 13 -- दशमेश नगर गुरुद्वारा दशमेश दरबार में आयोजित चौथे श्री सम्पट अखंड पाठ साहिब का समापन रविवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आ। सम्पट अखंड पाठ की विशेषता यह रही कि प्रत्येक श्लोक के बाद 'कानड़ा महला, जन को प्रभु असने, साजनो तू मीत मेरा, गृह तेरे सभ कह रहाउ' का गायन किया गया। यह परंपरा डेरा बाबा ईशर सिंह राड़ा साहिब से प्राप्त बताई गई, जिसे पूर्ण मर्यादा और श्रद्धा के साथ निभाया गया।गुरु ग्रंथ साहिब में 2000 से अधिक श्लोक हैं। प्रत्येक श्लोक के साथ उपरोक्त शबद का दो बार उच्चारण किए जाने के कारण इस अखंड पाठ को पूर्ण होने में लगभग 7 दिन का समय लगा, इसी कारण इसे 'सम्पट अखंड पाठ' कहा जाता है। संगत ने बढ़ चढ़कर सेवा की और प्रसाद ग्रहण किया। रागी जत्थों ने गुरवाणी का भावपूर्ण गायन किया। तेजबीर सिंह, इकबाल सिंह कथूरिया, जगमोहन सिंह...