सिमडेगा, अप्रैल 10 -- सिमडेगा, प्रतिनिधि। शुक्रवार को समाहरणालय परिसर में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। जब डीसी कंचन सिंह खुद हाथों में मड़ुआ का बिचड़ा लेकर कीचड़ भरे खेतों में उतरीं। इस खास अभियान में डीसी अकेली नहीं थीं। उनके साथ कई महिलाओं ने भी मड़ुआ की रोपनी की। सूट-बूट और फाइलों की दुनिया से निकलकर जब डीसी खेत में उतरी, तो समाहरणालय का माहौल किसी उत्सव जैसा नजर आने लगा। बता दें कि कुछ समय पहले तक समाहरणालय परिसर की यह जमीन खाली और उपेक्षित पड़ी थी। यहां उगी घास-फूस झाड़ियों का रुप ले लिया था। इससे समाहरणालय परिसर की खुबसुरती फीकी पड़ गई थी। लेकिन डीसी कंचन सिंह की दूरदर्शी सोच और व्यक्तिगत रुचि के कारण आज यहां की कई एकड़ जमीन की सूरत बदल चुकी है। वर्तमान में यहां न केवल मडुआ बल्कि गेहुं सहित विभिन्न प्रकार की मौसमी फसलें और फुल लहलहा ...
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