मधुबनी, अप्रैल 6 -- राजनगर। राजनगर के सुगौना स्थित संत कबीर आश्रम परिसर में आयोजित सद्गुरू कबीर सदज्ञान सह अन्तर्राष्ट्रीय कबीरपंथी संत सम्मेलन के समापन सत्र में महात्मओं ने कहा कि कबीर दास जी वेद, पुराण व ग्रंथों की बात से इतर सरल, सादगी, सत्कर्म व व्यवहारिकता की बातों का प्राथमिकता देते थे। जातिगत भेदभाव व रूढ़िवादी आडंबर के घोर विरोधी थे। कबीरवाणी 'जात-पात पुछै न कोई, हरि के भजै सो हरि के होई, एवं पाथर पूजे हरि मिलै तो मै पूजू पहार, घर की चाकी कोउ न पूजै-जा पीसा खाए संसार' में इसकी स्पष्ट झलक दिखती है। वक्ताओं ने स्वर्ग व नर्क भेजने की ठेका लेने वाले तथाकथित साधु- संतों के आडंबरयुक्त प्रपंच से बचने, एवं श्रमजीवी बनकर कर्मयोगी व उद्यमी बनने की अपील की। इसके लिए सबों ने कबीर साहेब की आदर्शो पर चलने की बात कही। अयोजन समिति के अध्यक्ष परमेश...