मुजफ्फरपुर, दिसम्बर 2 -- मुशहरी, हिसं। समाजवादी विचारक और चिंतक स्मृतिशेष सच्चिदानंद सिन्हा के चिंतन में हमेशा समाज के अंतिम पंक्ति और पायदान में खड़े अंतिम व्यक्ति का हित निहित रहता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन एक सच्चे संत के रूप में व्यतीत किया। अंतिम आदमी तक विकास और मानव कल्याण के लिये जीवनपर्यंत कार्य और लेखन करते रहे। ये बातें बातें मंगलवार को सच्चिदानंद बाबू के मणिका विशुनपुर चांद स्थित उनके सादगी भरे आवास चमेला कुटीर पर आयोजित स्मृति सभा में उनके परिजन और सान्निध्य प्राप्त सहयोगी वक्ताओं ने कहीं। 19 नवंबर 2025 को 98 वर्ष की आयु में सच्चिदानंद बाबू का निधन हुआ। वक्ताओं में शामिल उनके भाई पीयूसीएल के पूर्व अध्यक्ष प्रो. प्रभाकर सिन्हा ने कहा कि आईएससी तक पढ़ाई फिर ट्रेड यूनियन में काम, मजदूरी और पुनः स्व अध्ययन करते हुए विभिन्न विषयों...