विकासनगर, मई 17 -- अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड के लोक साहित्य आयाम की ओर से सरस्वती विद्या मंदिर बाबूगढ़ में संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में साहित्यकारों और अन्य वक्ताओं ने लोक साहित्य की वैश्विक दृष्टि: आत्मबोध से विश्व बोध' विषय पर चर्चा की। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने कहा कि लोक साहित्य वो मौखिक अभिव्यक्ति है जिसे सामान्य लोक समूह अपना मानता हो। जिसमें उस लोक के रीति रिवाज, धार्मिक, सामाजिक मान्यताएं, खान पान, रहन सहन परंपराएं समाहित रहती है। उन्होंने कहा कि लोक साहित्य किसी समाज विशेष या अंचल विशेष का प्रतिबिंब होता है।कार्यक्रम की संयोजक रेखा खत्री रौथाण ने कहा कि समाज के वैभवशाली इतिहास की जानकारी लोक साहित्य से मिलती है। लोक साहित्य नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, मान्यताओं की जानका...