वाराणसी, अगस्त 23 -- वाराणसी। एक इतिहासकार का दायित्व सिर्फ सटीक लेखन ही नहीं है। इतिहासकार पर समाज के निर्माण की जिम्मेदारी भी है। हमें अपने पूर्ववर्ती इतिहासकारों से प्रेरणा लेकर मूलस्रोतों से मिलान करते हुए लेखन करना है। ये बातें विषय विशेषज्ञ डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहीं। भारतीय इतिहास संकलन समिति, काशीप्रांत के तत्वावधान में पार्श्वनाथ विद्यापीठ, करौंदी स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सभागार में रविवार को हुई कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 'इतिहास प्रयोजन : अध्ययन, अनुसंधान और लेखन के संदर्भ में' विषयक कार्यशाला में डॉ. पांडेय ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने अपने त्याग एवं समर्पण के माध्यम से हमारी सभ्यता एवं संस्कृति को बचाए रखा। हिस्ट्री ऑफ इकोनॉमिक के अध्ययन से पता चलता है कि हमारे पास पूरे विश्व को देने के लिए विपुल सामग्...