नई दिल्ली, मई 4 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से समलैंगिक व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई और उन पर नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि यह मामला तीन जज की पीठ के समक्ष रखा जाएगा, जिसका गठन मुख्य न्यायाधीश करेंगे। पीठ ने कहा कि अंतरिम आदेश देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। अदालत ने मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद के लिए निर्धारित की। संसद ने 25 मार्च को समलैंगिक व्यक्तियों के संरक्षण और अधिकारों से संबंधित कानून में संशोधन करने वाला विधेयक पारित किया था। इसे 30 मार्च को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी।
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