किशनगंज, जुलाई 9 -- किशनगंज। निज संवाददाता जन्मजात हृदय रोग (कंजेनिटल हार्ट डिजीज) केवल एक चिकित्सीय चुनौती नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए सामाजिक और आर्थिक संकट भी बन जाता है, जिनके पास महंगे उपचार का खर्च उठाने की क्षमता नहीं होती। भारत में ऐसे हजारों बच्चे केवल इसलिए समय पर इलाज से वंचित रह जाते हैं क्योंकि विशेषज्ञ संस्थान दूर हैं और उपचार अत्यधिक खर्चीला है। ऐसे परिदृश्य में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) एवं बाल हृदय योजना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के उस मानवीय पक्ष को मजबूत कर रही है, जहाँ बीमारी नहीं बल्कि बच्चे का जीवन सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाता है। यह योजना केवल इलाज उपलब्ध नहीं करा रही, बल्कि यह सुनिश्चित कर रही है कि किसी भी बच्चे का भविष्य आर्थिक अभाव के कारण अधूरा न रह जाए। इसी क्रम में गुरुवार को किश...