रिषिकेष, सितम्बर 27 -- 28 सितंबर को प्रति वर्ष विश्व रेबीज डे मनाया जाता है। एम्स ऋषिकेश ने इस मामले में एडवाइजरी जारी कर कहा है कि रेबीज से बचाव संभव है, लेकिन कुत्ते के काटने पर इसे नजर अंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को रेबीज के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है। संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की हेड प्रोफेसर वर्तिका सक्सेना ने बताया कि रेबीज एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। यह एक वायरल और जूनोटिक बीमारी है, जो संक्रमित पशु की लार के माध्यम से मुख्यतः काटने, खरोंचने या खुले घाव, श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क से मनुष्यों में फैलती है। यह भी पढ़ें- विश्व रेबीज दिवस पर कल पालतू कुत्तों का होगा मुफ्त टीकाकरण उन्होंने कहा कि मनुष्यों में रेबीज के अधिकांश मामले कुत्तों से संबंधित होते हैं।

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