रांची, अगस्त 28 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि बिजली आपूर्ति समझौता समाप्त होने के बाद भी यदि झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) उपभोक्ता की जमा राशि लौटाने में देरी करता है, तो उसे वास्तविक भुगतान की तारीख तक ब्याज देना होगा। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने कहा कि समझौता समाप्त होने के साथ ही निगम की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। जमा राशि लौटाने में हुई देरी के लिए निर्धारित नियमों के तहत ब्याज का भुगतान करना अनिवार्य है। आदित्यपुर स्थित आरुष मेटल लिमिटेड की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह निर्देश दिया।

2018 में सरेंडर किया था बिजली कनेक्शन कंपनी ने मार्च 2018 में अपना बिजली कनेक्शन सरेंडर कर दिया था। इसके साथ ही कंपनी और जेबीवीएनएल...