नई दिल्ली, मार्च 21 -- नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के तेजी से बढ़ते मामले सभ्य समाज की बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। इसकी वजह अक्सर तनाव, सामाजिक दबाव व परस्पर सहयोग न मिलना है। हाईकोर्ट ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए यह टिप्पणी की। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने कहा कि जीवित रहने की प्रवृत्ति सभी प्राणियों में होती है। अपनी जान लेना अक्सर ऐसी मजबूर करने वाली परिस्थितियों का परिणाम होता है, जो इस प्रवृत्ति पर हावी हो जाती हैं। पीठ ने सभ्य समाज में इस प्रवृति के बढ़ने पर बल देते हुए कहा कि आत्महत्या सभ्य दुनिया की समस्या लगती है, क्योंकि आदिवासी समाज में इसके बारे में शायद ही कभी सुना जाता है। पीठ ने ये टिप्पणियां पति की ओर से दायर अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए क...