बरेली, सितम्बर 7 -- फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रकरण में पकड़ा गया आउटसोर्सिंग कर्मचारी कुलदीप भले ही सीएमओ कार्यालय में सपोर्ट स्टाफ के पद पर तैनात था, उसने कई साल से डाटा इंट्री आपरेटर का ही काम किया। कुलदीप पहला सपोर्ट स्टाफ नहीं है, सीएमओ कार्यालय में ऐसे कई लोग हैं जो दिखावे के लिए आउटसोर्सिंग कर्मचारी हैं, साफ-सफाई के लिए रखे गए हैं। उसमें कोई चिकित्सा प्रतिपूर्ति की लाखों-करोड़ों के बिल का काम देख रहा तो कोई शहरी एनएचएम में सप्लायर ही बन गया। कुलदीप के पकड़े जाने के बाद अब नोडल से लेकर बाबू तक, अपना-अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। खुद सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह का कहना है कि दिव्यांग प्रमाण पत्र के फर्जीवाड़े में सीधे तौर पर उच्चाधिकारियों की कोई भूमिका नहीं है। लेकिन सवाल उठ रहा कि सपोर्ट स्टाफ को इतनी छूट दी किसने। शहरी एनएचएम में तैनात सपोर्ट ...