भभुआ, अप्रैल 29 -- पेज चार की खबर सनातन दृष्टि से सतत और समावेशी विकास की परिकल्पना भोग नहीं, संयम और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर जोर 'विकसित भारत 2047' में सांस्कृतिक विरासत और आधुनिकता के समन्वय की वकालत भभुआ, नगर संवाददाता। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में आयोजित "विकसित भारत 2047 : विकास की सनातन दृष्टि" विषयक राष्ट्रीय सेमिनार में भभुआ शहर के तिवारी टोला निवासी शिक्षाविद् विवेकानंद तिवारी ने सनातन परंपरा आधारित विकास मॉडल पर अपने विचार रखे।

विकास का अर्थ उन्होंने कहा कि सनातन दृष्टि में विकास का अर्थ केवल भौतिक समृद्धि नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलित सह-अस्तित्व है। "हमारी परंपरा भोग के बजाय त्याग और संयम को प्राथमिकता देती है। विकास ऐसा हो जिसमें प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि उसके साथ सामंजस्य स्थापित...