चेपॉक, मई 4 -- राजनीति में एक पुरानी कहावत है- सत्ता का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है, तो जनता बैलेट पेपर (या ईवीएम) से उसका सटीक इलाज करती है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के जो ताजा रुझान और आंकड़े सामने आ रहे हैं, वो सिर्फ एक चुनावी हार नहीं हैं, बल्कि देश की सबसे पुरानी और मजबूत राजनीतिक पार्टियों में से एक 'द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम' (DMK) के लिए एक ऐसा सियासी भूकंप हैं, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन खुद अपनी सीट से 2277 वोटों से पीछे चल रहे हैं, तो वहीं उनके बेटे, जिन्हें डीएमके का 'भविष्य' और 'युवराज' कहा जाता है, उदयनिधि स्टालिन भी चेपॉक जैसी अपनी सुरक्षित और पारिवारिक सीट से पिछड़ गए हैं। आइए समझते हैं कि आखिर तमिलनाडु में डीएमके के इस 'घमंड' के टूटने की पूरी कहानी क्या है और इसके पीछे के मुख्य कारण...