किशनगंज, अगस्त 9 -- किशनगंज, निज संवाददाता। स्वास्थ्य व्यवस्था की असली कसौटी यह नहीं है कि अस्पताल में कितनी अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं, बल्कि यह है कि उनकी पहुंच उस व्यक्ति तक कितनी है जो बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च जुटाने के लिए संघर्ष करता है। इसी सोच के साथ सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच और उपचार की सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर किशनगंज सदर अस्पताल में दिखाई दे रहा है। यहां पीपीपी मॉडल पर संचालित सिटी स्कैन सेवा उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी है, जिनके लिए निजी केंद्रों पर महंगी जांच कराना आसान नहीं था। वर्ष 2020-21 में 790 जांच से शुरू हुई यह सेवा 2025-26 में बढ़कर 8,802 जांच तक पहुंची। मई से जुलाई 2026 के बीच भी 2,601 मरीजों ने इसका लाभ लिया। भारत में स्वास्थ्य खर्च में परिवारों की जेब...