सहरसा, दिसम्बर 14 -- सहरसा, हमारे प्रतिनिधि। सदर अस्पताल की स्थिति एक बार फिर सुर्खियों में है। टूटे दरवाजे, दरकी दीवारें, बिना बेडशीट के बिस्तर, बदबूदार जलजमाव और लगातार बढ़ती सीलन ये दृश्य अब यहां आम हो चुके हैं। मरीजों की पीड़ा और उनके लिए जरूरी सुविधाओं की अनदेखी को भले ही अस्पताल प्रशासन हल्के में लेता रहा हो, लेकिन एनक्वास और लक्ष्य प्रमाणपत्र के लिए शुरू की गई कवायद अचानक तेज हो गई है। ऐसा लगता है मानो प्रशासन को मरीजों से ज्यादा चिंता अब निरीक्षण टीम पर अच्छी छवि छोड़ने की है। अवार्ड और प्रमाणपत्र के दबाव में अस्पताल ने आपातकालीन वार्ड की दीवारों पर सिर्फ रंग की एक नई परत चढ़ाकर सीलन को छुपाने की कोशिश की है, लेकिन बदबू और उभरी सतह से यह साफ झलक रहा है कि समस्या अंदर ही अंदर जस की तस बनी हुई है। कई जगहों पर स्वास्थ्य संबंधी फ्लेक्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.