विकासनगर, मार्च 31 -- बरोटीवाला के विलेज गार्डन में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को कथा व्यास डॉ. सुनील पैन्यूली ने विभिन्न प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं।

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