बस्ती, दिसम्बर 12 -- बस्ती। जिसके चरित्र को देखने मात्र से ही घृणा हो वहीं धुंधकारी है। वह अपने कुकर्मों से प्रेत बनता है। गोकर्ण जैसा भाई और भागवत ही प्रेत योनि से मुक्ति दिला सकते हैं। जो पुत्र अपने माता-पिता का अनादार कर दुराचार और पापाचार करते हुए समाज को कष्ट देते हैं वे सभी धुंधकारी हैं। धुंधकारी पांच वेश्याओं में फंस जाता है, शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध जीव को बांध लेते हैं। जिन हाथों से श्रीकृष्ण की सेवा न हो, जो हाथ परोपकार न करें वे हाथ शव के समान हैं। तन और मन को दंड दोगे तो पाप का क्षय होगा। उक्त बाते कथावाचक मुक्तामणि शास्त्री ने दुर्गा नगर कटरा में आयोजित भगवत कथा के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि सत्य को समर्पित करने वाला ही सत्ता का अधिकारी है। सत्य स्वरूप परमात्मा के प्रति जब जीव का समर्पण होता है, तभी कर्तव्य का ज्ञान होता...