गौरीगंज, फरवरी 13 -- गौरीगंज। गौरीगंज के रंजीतपुर वार्ड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री ने पुष्प समर्पित कर कथा का शुभारंभ किया। अपने प्रवचन में उन्होंने भागवत महापुराण के प्रथम श्लोक की अंतिम पंक्ति सत्यं परम धीमहि को जीवन का मूल संदेश बताते हुए कहा कि सनातन धर्म अच्छी बात कहने के लिए नहीं, बल्कि सच्ची बात कहने के लिए बना है। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा का सार सत्यमेव जयते नानृतम् में निहित है। जिसका अर्थ है कि सत्य की ही विजय होती है, असत्य कभी विजयी नहीं हो सकता। महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कथा वाचक ने भीष्म पितामह के समर्पण भाव को धर्म का सर्वोच्च उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भीष्म को सत्य और विजय का ज्ञान होते हुए भी वे अपने कर्तव्य और परमात्मा की इच्छा के प्रति पूर्ण समर्...