सत्ता पक्ष के लिए खतरे की घंटी
नई दिल्ली, अगस्त 4 -- यह कहना गलत नहीं होगा कि हालिया विधानसभा उपचुनावों के परिणाम भारतीय जनता पार्टी के लिए खतरे की घंटी हैं। यह बता रहा है कि अब चुनावी मुद्दे पाकिस्तान, बांग्लादेश या हिंदू-मुस्लिम नहीं रहने वाले। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण जैसी बातें मानो अब पुरानी हो गई हैं। लगता यही है कि मतदाताओं ने हालिया मुद्दों के आधार पर अपना मत जाहिर किया, फिर चाहे वह राम मंदिर व अन्य बड़े-बड़े मंदिरों में चढ़ावा चोरी का मामला हो, छात्रों का देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन हो, पेपर लीक का मसला हो, रोजगार से जुड़े सवाल हों या फिर सत्ता पक्ष द्वारा अपनाई गई दमनकारी नीति। इन सबको मतदाताओं ने ध्यान में रखा और अपने विचार ईवीएम में दर्ज किए। बांकीपुर का नतीजा तो बिहार की उस जातीय गणित को प्रभावित करने की क्षमता रखता है, जिसे भाजपा हाल तक लगभग तय मानकर चल रही थी।...
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