मिर्जापुर, जुलाई 15 -- मिर्जापुर,संवाददाता। नगर के केबीपीजी कॉलेज के गणेशगंज स्थित बीएड विभाग में अंतर राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं केबीपीजी कालेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय बोधि-पथ कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को पर्यावरण और बौद्ध दर्शन पर गंभीर मंथन हुआ। यह भी पढ़ें- बुद्ध के उपदेशों में वृक्ष,नदियों और वन्य जीवों का संरक्षण निहीतबौद्ध दृष्टिकोण मुख्य वक्ता मध्यकालीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अमिताभ तिवारी ने सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण विषय पर कहा कि बौद्ध दर्शन मानव को प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसका एक अभिन्न हिस्सा मानता है। उन्होंने वर्तमान विकास मॉडल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बौद्ध विचार आधुनिक भौतिकवादी और अत्यधिक उपभोग-आधारित...