कानपुर, फरवरी 11 -- कानपुर। बांके बिहारी जी परिवार समिति के तत्वावधान में मोतीझील में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी ने भगवत प्रसंगों का मनोरम वर्णन किया। उन्होंने श्रोताओं से कहा कि बच्चों को संस्कारवान व साहसी बनाएं। यदि उनमें अच्छे संस्कार हैं तो वह गलत रास्तों पर चल ही नहीं सकते हैं। ध्रुवचरित का वर्णन करते हुए कहा यदि सच्ची लगन हो तो भगवान स्वयं आकर भक्तों को दर्शन देते हैं। कहा, पुत्र के लिए मां का दर्जा सबसे ऊपर है। मां की कृपा पाने वाले पर सदैव परमात्मा की कृपा रहती है। उन्होंने चार प्रकार के भजन की व्याख्या करते हुए बताया कि निष्काम भक्ति सर्वश्रेष्ठ होती है। मनु और प्रियव्रत कथा, भगवान के चौबीस अवतार, जड़ भरत, ऋषभदेव महाराज की कथा, विभिन्न नरकों का वर्णन आदि कथाओं का अद्भुत वर्णन किया।

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