रांची, सितम्बर 26 -- रांची, संवाददाता। राधा-कृष्ण मंदिर, पुदांग में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शनिवार को साध्वी गोपिका ने कंस वध, रुक्मिणी विवाह और कृष्ण-सुदामा की निस्वार्थ मित्रता के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। साध्वी ने बताया कि रुक्मिणी ने पूर्ण समर्पण भाव से भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य माना, जिसके बाद प्रभु ने उनकी पुकार सुनकर विवाह रचाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची भक्ति में श्रद्धा और निष्ठा का विशेष महत्व है। कंस उद्धार के प्रसंग में उन्होंने संदेश दिया कि अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए ही ईश्वर का अवतार होता है। वहीं, कृष्ण-सुदामा प्रसंग के जरिए संबंधों में प्रेम और समानता की सीख दी गई। यह भी पढ़ें- Ranchi News: अधर्म बढ़ने पर धर्म की स्थापना को अवतार लेते है ईश्वर - साध्वी गोपिका इस दौरान ...