गिरडीह, मई 7 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। सम्मेदशिखर मधुबन स्थित गुणायतन में साधनारत आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि प्रमाण सागर जी महाराज ने गुरुवार को विधिपूर्वक केशलौच कर जैन धर्म में वैराग्य, तप और आत्मसंयम की महान परंपरा का अद्भुत उदाहरण पेश किया। दिगंबर जैन मुनि परंपरा में केशलौच त्याग, सहनशीलता और आत्मबल का प्रतीक है। दिगंबर जैन मुनिराज प्रत्येक दो-तीन या चार माह में अपने हाथों से केशलौच कर देह से ममता हटाने और आत्मसाधना को सुदृढ़ करने का संदेश देते हैं। मुनि प्रमाण सागर जी महाराज प्रत्येक दो माह में अपने हाथों से बाल उखाड़कर आत्मसाधना में लीन रहते हैं। यह प्रक्रिया जैन मुनि के 28 मूलगुणों में एक है। श्रद्धालुओं ने मुनि श्री की कठोर तपस्या और संयममयी साधना को श्रद्धाभाव से नमन किया। गुणायतन में आयोजित शंका समाधान क...