जयपुर, जून 9 -- राजस्थान में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति एक बार फिर रेगिस्तानी रेत की तरह गरम हो चुकी है। हाल ही में अशोक गहलोत और सचिन पायलट दिल्ली में हाथ मिलाते और साथ ठहाके लगाते नजर आए थे, पर कुछ ही दिनों में खुद पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि दिल नहीं मिले हैं। अशोक गहलोत ने अचानक मीडिया को बुलाकर जिस तरह सचिन पायलट की 'बगावत' याद दिलाई और अपनी वफादारी की तरफदारी की, उसने जयपुर से दिल्ली तक सबको चौंका दिया है। आखिर क्यों गहलोत गड़े मुर्दे उखाड़ने लगे? उन्हें क्यों 2020 और 22 के घटनाक्रम को याद दिलाने की जरूरत पड़ गई? राजस्थान कांग्रेस की हर हलचल पर करीब से निगाह रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 'जादूगर' कहे जाने वाले गहलोत 'यूं' ही कुछ भी नहीं करते। ना ही उन्होंने चलते-फिरते या फिर उस तरह का कोई सवाल आने पर इस तरह ...