भागलपुर, जून 10 -- कहलगांव, निज प्रतिनिधि। संस्कृत ही विश्व को एकता के सूत्र में बांध सकती है। इसकी वैज्ञानिकता शोध से पता है कि इसके उच्चारण कर लेने मात्र से कई व्याधियां समाप्त हो जाती है। आज संपूर्ण विश्व इस बात को स्वीकार कर रहा है। विश्व इसमें भरे ज्ञान विज्ञान से लाभान्वित होने के लिए लालायित रहते हैं। यह बातें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दरभंगा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अखिल भारतीय संस्कृत भारती के पूर्व संयोजक डॉ. चंद्रकांत शुक्ल ने जवाहरलाल उच्च विद्यालय धनौरा में चल संस्कृत संभाषण शिविर को वर्चुअल माध्यम से जुड़ कर छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कही है।

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