वाराणसी, मई 2 -- वाराणसी। स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के कुलपति प्रो. रामचंद्र भट्ट ने कहा कि गुरुकुल व्यवस्था केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, चरित्र निर्माण एवं जीवन मूल्यों की अनुपम परंपरा रही है, जिसे पुनः जीवित करना समय की आवश्यकता है। सोनिया स्थित चैतन्य योग सेवा संस्था में शनिवार को प्रो. भट्ट ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के निर्माण का आधार है। उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति का प्राण बताते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक साधना नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति, मानसिक संतुलन और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। उनके ओजस्वी एवं ज्ञानवर्धक उद्बोधन ने उपस्थित सभी श्रोताओं को प्रभावित किया। चैतन्य योग सेवा संस्था के सचिव योगाचार्य आशीष टंडन, उपाध्यक्ष किशन...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.