झांसी, अगस्त 3 -- झांसी। प्रख्यात साहित्यकार और शिक्षाविद प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि हमें अपनी परंपरा, संस्कार और संस्कृति को बिना किसी न्यूनता बोध या संकोच के आगे बढ़ाना चाहिए। हमें अपने संस्कारों की थाती को संजोकर रखना है तभी भारतीय ज्ञान परंपरा आगे बढ़ेगी। उन्होंने यह बात बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त सम्मान समारोह उद्घाटन सत्र कही। प्रो जोशी ने कहा कि जो राष्ट्र अपने महापुरुषों का सम्मान नहीं कर सकता उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा कैसे मिलेगी। प्रो. जोशी ने तमसो मा ज्योतिर्गमय मंत्र से अपने उद्बोधन का श्रीगणेश किया। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या मैथिलीशरण गुप्त शेक्सपियर, टालस्टाय,मोजार्ट आदि से किसी मायने में कम हैं। उन्होंने कहा कि जब हम बा...