मऊ, फरवरी 25 -- दोहरीघाट, हिन्दुस्तान संवाद। गोठा हनुमानगढ़ी मंदिर में मां दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा एवं शतचंण्डी महायज्ञ में चल रही श्रीराम कथा के पहले दिन बाल ब्यास रामाश्रय ने श्रद्धालुओं को कथा का अमृत रसपान कराया। कहा कि रामचरित मानस संस्कारों की कथा है। सत्ता के त्याग की कथा है। महाभारत सत्ता के संघर्ष की कथा है। राम की कथा चन्द्रमा से भी शीतल है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में संस्कारों का विशेष महत्व है। एक संस्कारवान व्यक्ति खुद सद्मार्ग पर चलते हुए दूसरों के लिए मार्गदर्शक बन जाता है। जबकि संस्कार से विमुख व्यक्ति खुद तो पतित हो ही जाता है, उसके सम्पर्क में आने वाला हर कोई कलंकित हो जाता है। कहा कि जिन-जिन महापुरुषों को शक्ति केंद्रों का ज्ञान हुआ और जैसे-जैसे उन्होंने इनका विवेकपूर्ण उपयोग किया, वैसे-वैसे उनकी उन्नति होती गई। क...