नई दिल्ली, जून 2 -- संसार में सबसे बड़ा सुख क्या है: एक दिन कुछ बौद्ध भिक्षुओं में चर्चा हो रही थी। चर्चा का विषय था- 'संसार में सबसे बड़ा सुख क्या है?' अगर संसार में सुख ही सुख है, तो फिर हम सब या दूसरे लोग उसे छोड़कर भिक्षु क्यों बन जाते हैं? सुख तो इसका कारण नहीं है। दुख होने पर ही व्यक्ति भिक्षु होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि व्यक्ति यदि यह समझ ले कि सुख-दुख कुछ नहीं है, तो फिर सारी परेशानी ही खत्म हो जाएगी। व्यक्ति यदि समभाव से परिस्थितियों का सामना करना सीख जाए, तो फिर उसे गृहस्थ से भिक्षु होने की आवश्यकता ही नहीं होगी। व्यक्ति भिक्षु ही तब होता है, जब उसे लगता है कि यह संसार ही व्यर्थ है। रिश्ते-नाते सब मोह-माया है। यहां आने वाले भिक्षु भी ऐसे ही घर से भागकर यहां आए होंगे। किसी की पत्नी मर गई होगी, तो कोई जीवन में कुछ न कर पाने की ...