सासाराम, जून 1 -- दिनारा, एक संवाददाता। यह दुनिया एक चलती हुई गाड़ी है और हम सभी इसके यात्री हैं। इस संसार को अपना समझ लेना ही सबसे बड़ा झंझट और मोह है। जैसे नौका पानी में रहती है, वैसे ही हमें संसार में रहना चाहिए। लेकिन नौका के भीतर पानी नहीं आना चाहिए। अन्यथा जीवन रूपी नैया डूब जाएगी। उक्त बातें मउडिहरा में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ में श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने कही।

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