लखनऊ, अप्रैल 2 -- राजधानी में वेंटिलेटर के लिए मरीज एक से दूसरे अस्पताल तक दौड़ लगा रहे हैं। लेकिन वेंटिलेटर खाली नहीं मिल पा रहे हैं। करीब 70 वेंटिलेटर तो विशेषज्ञ, टेक्नीशियन व संसाधनों के अभाव में ठप हैं। नतीजतन मरीज को समय पर समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीजों की सांसें थम रही हैं। गुरुवार को वेंटिलेटर बेड समय पर न मिलने से देवरिया निवासी मरीज की मौत हो गई थी। करीब 300 किलोमीटर का सफर तय कर केजीएमयू पहुंचे मरीज को बलरामपुर अस्पताल भेजा गया। जहां भर्ती के कुछ समय बाद ही मरीज की सांसें थम गई थीं। केजीएमयू में करीब 300 वेंटिलेटर हैं। यहां ज्यादातर वेंटिलेटर भरे रहते हैं। केजीएमयू में प्रदेश भर से गंभीर मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। एक-एक वेंटिलेटर बेड के लिए मारामारी रहती है। लोहिया संस्थान में करीब 50 वेंटिलेटर बेड हैं। यहां भी ज्यादा...