नई दिल्ली, जुलाई 26 -- एक बड़े आंदोलन का समापन हो गया और आंदोलन में शामिल छात्र व अन्य लोग अपने-अपने काम पर लौट गए, पर क्या भारतीय संसद भी काम पर लौट आएगी? 20 जुलाई को संसद का सत्र शुरू हुआ है और लोकसभा की उत्पादकता 5 प्रतिशत और राज्यसभा की 6 प्रतिशत रही है। क्या इस देश के सारे कार्य हो चुके हैं और केवल राजनीति करना ही शेष है? क्या संसद में कोई किसी को कार्य से रोक रहा है? क्या कोई ऐसी पार्टी है, जो चाहती है कि संसद ठीक से कार्य नहीं करे? ऐसे कई सवाल पहले भी खड़े होते रहे हैं और आज फिर हर संवेदनशील भारतीय को सता रहे हैं। जो देश विकसित हो चुके हैं, वहां की संसद लगभग 100 प्रतिशत से ज्यादा उत्पादकता के साथ काम करती है, पर ऐसा क्यों है कि विकासशील भारत में संसदीय कामकाज टेढ़ी खीर है? पेपर लीक को लेकर पूरा देश चिंतित था, पर यह सोचने वाली बात ह...