नई दिल्ली, अगस्त 6 -- दिल्ली में 20 जुलाई को हुए संसद चलो मार्च के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष कोर्ट ने बुधवार को कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा रोकने के लिए समाज और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के पास सबसे असरदार तरीका युवाओं की बात सुनना और उन्हें समझाना-बुझाना है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ताकतवर सरकार के नाम पर कोई भी आक्रामक कार्रवाई तनाव बढ़ा सकती है और और ज्यादा अशांति पैदा कर सकती है। सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने दिल्ली में 20 जुलाई को हुए संसद चलो मार्च के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए ये टिप्पणियां कीं। इस मार्च के दौरान हिंसा हुई थी। कोर्ट ने निर्देश...