कानपुर, दिसम्बर 14 -- कानपुर वरिष्ठ, संवाददाता। जयप्रकाश नारायण स्मृति व्याख्यान माला के अंतर्गत 'संविधान की यात्रा : संघर्ष, सपने और सामाजिक न्याय' विषय पर विचार गोष्ठी में अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रोफेसर गोपाल प्रधान ने कहा कि संविधान संघर्षों की उपज है। इसे वैसे ही बचाना भी होगा। भारत की आजादी की लड़ाई एक सतत प्रक्रिया रही है। हरिहरनाथ शास्त्री भवन में आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि मताधिकार सभी नागरिकों को संघर्ष के बल पर मिला है और अब राजनीतिक लोकतंत्र को सामाजिक लोकतंत्र में बदलने की जरूरत है। वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि संविधान नागरिक अधिकारों के सतत संघर्षों से बनता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर अपूर्वानन्द ने वर्तमान व्यवस्था और न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संव...
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