नई दिल्ली, जुलाई 27 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल की एक याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची की दोबारा से व्याख्या करने की मांग की है। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि संविधान के 10वीं अनुसूची की इस तरह से व्याख्या की गई है जो सांसदों/विधायकों को राजनीतिक दलों के विलय के जरिए दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने में मददगार साबित हो रहा है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने मामले में नोटिस जारी कर केंद्र को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया और कहा कि इसमें कई ऐसे मुद्दे शामिल हैं जिन पर संसद को फैसला लेना होगा। राज्यसभा सांसद सिब्बल ने पीठ से कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसका देश की राजनीति पर बहुत...