पटना, नवम्बर 26 -- जगजीवन राम शोध संस्थान में बुधवार को लोकतंत्र की नई चुनौतियां और निर्वाचन आयोग की भूमिका विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें सांसद सुधाकर सिंह, पूर्व विस अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, पूर्व मंत्री डॉ. रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि भारतीय संविधान निर्माताओं ने गहन चिंतन के बाद जिन बिंदुओं पर आधारित करके प्रजातंत्र के प्रजातांत्रिकरण के लक्ष्य के साथ समावेशी भारतीय संविधान की रचना की थी, उस व्यापक अवधारणा की आज चुनाव आयोग अपने रवैये से धज्जियां उड़ा रहा है। इसे सभी देशवासी देख रहे हैं। कार्यक्रम संयोजक राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो सुबोध मेहता ने कहा कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए कोई व्यक्ति या पार्टी हमारे संविधान के मूल्यों के साथ चाहे कितना भी खिलवाड़ करता रहे, संविधान स्थाई है। समयचक्र अपनी गति में...