नई दिल्ली, अक्टूबर 29 -- लखनऊ, विधि संवाददाता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के शिक्षकों के संबंध में बड़ा निर्णय सुनाया है। कहा है कि केजीबीवी में शिक्षकों को वर्षों तक संविदा पर रखकर, उनके लिए पद सृजित किए बिना और नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान दिए बिना काम कराना संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत निषिद्ध जबरन श्रम के समानहै। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने कहा कि शिक्षकों को दिया जा रहा मानदेय अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम है और इसे मानदेय कहना क्रूर मजाक है। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने राज्य सरकार को चार माह के भीतर केजीबीवी में शिक्षकों के पद स्वीकृत अथवा सृजित करने तथा उनकी सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों के समान बनाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालयने यह भी कहा कि याचियों और उन...