नई दिल्ली, सितम्बर 13 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल संयुक्त बैंक खाते का धारक होना किसी व्यक्ति को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोषी नहीं बनाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि चेक पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति ही इस अपराध के लिए उत्तरदायी होगा। इसी आधार पर अदालत ने पति को बरी कर दिया, जबकि पत्नी को दोषी करार दिया। पीठासीन अधिकारी मनीषा भाऊ की कोर्ट ने चौधरी बिल्डर्स की ओर से दायर शिकायत पर फैसला सुनाते हुए कृष्णा देवी को दोषी ठहराया, जबकि उनके पति आनंद कुमार वर्मा को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने पाया कि विवादित चेक संयुक्त खाते से जारी हुआ था, लेकिन उस पर केवल कृष्णा देवी के हस्ताक्षर थे।

मामले का विवरण मामले के अनुसार शिकायतकर्ता रा...