ललितपुर, सितम्बर 21 -- ललितपुर। संयम जीवन की लगाम है। जिस प्रकार बिना लगाम का घोड़ा अपने सवार को संकट में डाल सकता है, उसी प्रकार इ्द्रिरयों पर नियंत्रण न होने पर मनुष्य की इच्छाएं उसे पतन की ओर ले जाती हैं। उक्त विचार दशलक्षण महापर्व के अवसर पर उत्कर्ष समूह, भारत द्वारा आयोजित दस दिवसीय व्याख्यानमाला में षष्ठम दिवस उत्तम संयम धर्म विषय पर व्याख्यान देते हुए डा. सुनील जैन 'संचय' ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बिना ब्रेक की गाड़ी जिस प्रकार उपयोगी नहीं रह जाती, उसी प्रकार बिना संयम के अमूल्य मनुष्य जीवन भी अपनी सार्थकता खो देता है। इसलिए मनुष्य को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए इ्द्रिरयों को विवेक के अधीन रखना चाहिए। यह भी पढ़ें- Deogarh News: सदगति प्राप्त करने का सबसे प्रमुख साधन है उत्तम संयम धर्म का पालन जैन दर्शन में संयम के दो प्रमु...