नई दिल्ली, दिसम्बर 29 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। एम्स की ओर से कहा गया कि हर बच्चे में सिर्फ जननांग की बनावट के आधार पर ही लड़का या लड़की की पहचान नहीं हो सकती है। कुछ मामलों में जांच का सहारा लेना पड़ सकता है। तभी पता चलता है कि जन्म लेने वाला बच्चा लड़का है या लड़की। एम्स ने बताया कि ऐसे बच्चे डीएसडी (यौन विकास के विकार) से पीड़ित होते हैं। जागरूकता के अभाव में कई माता-पिता डीएसडी पीड़ित बच्चों का त्याग कर देते हैं। जबकि डीएसडी की जल्दी पहचान कर इलाज शुरू करने से बच्चे पूरी तरह ठीक हो सकते हैं और वे आगे चलकर सामान्य व वैवाहिक जीवन व्यतीत कर सकते हैं। एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि डीएसडी एक संवेदनशील विषय है। बच्चों का जन्म होने पर तुरंत एक सवाल पूछा जाता है कि लड़का है लड़की, लेकिन कुछ मामलों में संदेहास्पद स्थिति होती ...