रांची, जून 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि विशुद्ध रूप से पारिवारिक संपत्ति विवादों को आपराधिक मामला या एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम का स्वरूप देकर किसी व्यक्ति के अग्रिम जमानत के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करने संबंधी याचिका खारिज कर दी। मामला रांची के चुटिया निवासी स्वाति कच्छप और उनके जीजा निर्मल प्रसाद साहू के बीच लंबे समय से चल रहे फ्लैट और अन्य संपत्ति विवाद से जुड़ा है। स्वाति ने रांची की एससी/एसटी अदालत में शिकायत दर्ज कराते हुए अपने जीजा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 341 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए थे। मामले में गिरफ्त...