वाराणसी, अप्रैल 9 -- वाराणसी। संत रविदास ने शक्तिहीन को शक्ति संपन्न बनाने का भरसक प्रयास किया है। उनके इसी प्रयास का नाम 'बेगमपुर' है। उनका होना उस लोकवृत्त का होना है जहां संवाद, संप्रेषण और लोकतांत्रित गुणों से युक्त समाज एक साथ है।ये बातें प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहीं। वह संकटमोचन संगीत समारोह के दौरान सजे साहित्य-कला मंच पर बुधवार को अपनी पुस्तक 'भक्ति का लोकवृत्त और रविदास की कविताई' के लोकार्पण और संवाद पर लेखकीय वक्तव्य दे रहे थे। प्रो.शुक्ल बोले कि यह कहना गलत नहीं होगा कि रविदास भारतीय लोक की जीवनरेखा है। रविदास के वृहद साहित्य में श्रम और भक्ति साथ-साथ हैं। रविदास हमें सिखाते हैं कि कैसे समाज में स्वाभिमान के साथ जीवन जिया जा सकता है। रविदास ने अपनी कविता में भक्ति के लोकवृत्त की समूहिकता, संवादधर्मिता को खोलकर रखा है।सिंगापु...