भागलपुर, मार्च 10 -- संतों की शरण में आने से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। संतों की वाणी कभी झूठी नहीं होती। संत-साधु महात्माओं का हमेशा सम्मान करना चाहिए और उन्हें कभी भी खाली हाथ नहीं जाने देना चाहिए। जो भी संभव हो, उसी से उनका सत्कार कर विदाई देनी चाहिए। ये उक्त बातें संतमत के प्रधान आचार्य चतुरानंद महाराज ने कहलगांव के शारदा पाठशाला मैदान में आयोजित भागलपुर जिला संतमत सत्संग के 77वें दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन के अंतिम दिन प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने माता शबरी की भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चे भाव से संतों की सेवा और श्रद्धा रखने से जीव को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। अधिवेशन में प्रेमानंद बाबा, अनुभानंद बाबा, प्रेसानंद बाबा, स्वामी रामानंद शास्त्री, नित्यानंद अनुपम बाबा एवं वेदानंद बाबा ने भी अपने विचार ...