दुमका, फरवरी 27 -- दुमका, प्रतिनिधि। दुमका प्रखंड के टीकापहाड़ी गांव में दिसोम मारंग बुरु युग जाहेर आखड़ा एवं ग्रामीणों द्वारा संताल आदिवासी समाज का प्रमुख प्रकृति पर्व बाहा अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बाहा पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है। इस दिन पूज्य स्थल जाहेर थान में छावनी बनाई जाती है और स्थल की तैयारी की जाती है। इस दिन ग्रामीण गांव के नायकी (पुजारी) को उनके आंगन से नाच-गान के साथ जाहेर थान तक ले जाते हैं। वहां पहुंचने पर नायकी बोंगा दारी (पूज्य पेड़) सारजोम पेड़ (सखवा पेड़) के नीचे स्थित पूज्य स्थलों का गोबर और पानी से शुद्धिकरण करते हैं, जिसे गेह-गुरिह कहा जाता है। इसके बाद सिंदूर, काजल आदि अर्पित कर मातकोम (महुआ) और सारजोम (सखवा) के फूल चढ़ाए जाते हैं। बाहा पर्व में जाहेर ऐरा, मारांग बुरु, मोड़ेकू-तुरुयकू, धोरोम...
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