साहिबगंज, मई 21 -- बेंजामिन/पतना। संतालों की शादी में पालकी परंपरा से जुड़ा है । पालकी का विशेष सांस्कृतिक व सामाजिक महत्व भी है। पालकी नवविवाहित जोड़े के नए जीवन की शुरुआत व सम्मान को भी दर्शाता है। हालांकि आधुनिकता के प्रभाव से पालकी की पारंपरिक धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। अब संताली गांव में बहुत कम दुल्हा-दुल्हन को पालकी से विदा होते या फिर दुल्हा को शादी करने आते देखा जाता है। संताली परम्परा के जानकार बताते हैं कि पालकी की जगह अब चार पहिया वाहन (मोटर गाड़ी) ने ले लिया है। दरअसल, पहले के जमाने पर संताल आदिवासियों में लाटु बापला यानी बड़ी शादी होने पर अनिवार्य रूप से पालकी में बैठकर दुल्हा बराती लेकर शादी करने दुल्हन के गांव पहुंचता था।

पालकी की परंपरा दुल्हन के गांव पहुंचने पर सम्मान के साथ उसे स्वागत कर सभी टोलों में गुड़ आजो अर्थात...